New Year 2026: नई शुरुआत में चलिए एक गहरा और खूबसूरत संकल्प लें — सच्चे सम्मान का संकल्प।
सम्मान क्या है?
सम्मान यानी लोगों को बिना कुछ कहे पूरी तरह मान लेना। हमें लगे कि ये गलत है, फिर भी उन्हें जैसा है वैसा ही स्वीकार कर लें। किसी पर जजमेंट न करें (खुद पर भी नहीं), कोई दोष न दें, कंट्रोल न करें और आलोचना न करें।
जब हम कहते हैं, “लोगों को जैसा है वैसा स्वीकार करो”, तो मन में ये सवाल आता है, “तो क्या उन्हें बुरा काम करने दूं? क्या सलाह, सुझाव या गाइड न करूं?” नहीं! मतलब सिर्फ ये समझना कि हर कोई अलग है, सबकी अपनी सोच और चुनाव है। व्यक्ति को उसके काम से अलग रखें।
सम्मान वो तस्वीर है जो मैं किसी के बारे में बनाती हूं। ये उस व्यक्ति पर नहीं, बल्कि मेरी अपनी सोच की शुद्धता पर टिकी है। अगर मैं शुद्ध, प्यार भरी, पॉजिटिव और निष्पक्ष हूं, तो सबकी अच्छी तस्वीर बनाऊंगी। लेकिन अगर नेगेटिविटी में हूं, तो सबकी बुरी तस्वीर बनाऊंगी। तो सम्मान सिर्फ मेरी सोच पर निर्भर है, किसी और पर नहीं!
सम्मान हमारी अंदर की बात है। हम एक-दूसरे के बारे में क्या सोचते हैं, वो अलग चीज है। उदाहरण:
- चौकीदार सलाम कर सकता है, लेकिन मन में सोच सकता है, “ये आदमी कौन है?”
- सहकर्मी कह सकता है, “गुड मॉर्निंग, आपसे मिलकर अच्छा लगा”, लेकिन सोच सकता है, “शैतान आ गया!” क्या ये सम्मान है? नहीं!
हमने सुना है, “सम्मान दो, सम्मान लो।” क्या ये सही है? नहीं! सम्मान, प्यार, भरोसा सब एक तरफा है। जैसे ही दूसरों से उम्मीद करने लगोगे, सब खो देते हैं। सब भावनाएं हम खुद बनाते हैं। हम अपना व्यवहार दूसरों पर इतना टिकाए हैं कि अपना व्यक्तित्व ही खो दिया। उन्हें अपनी भावनाओं का दोष न दें।
ध्यान रखें: कभी व्यक्ति को टारगेट न करें। हम सब अंदर से शुद्ध और अच्छे हैं। दुनिया सुंदर इसलिए कि सब अलग हैं – सोच, राय, चुनाव, स्किल्स। बस इसे मान लें। लोग गलती करेंगे। उन्हें सशक्त बनाएं, पॉजिटिव फीडबैक दें। कर्ता का सम्मान करें, काम का नहीं!
क्या डर = सम्मान? है ?
नहीं! डर नेगेटिव है, नफरत पैदा करता है। डर से प्यार नहीं होता। “भगवान से डरो” ये बिल्कुल गलत है।
“सम्मान” पॉजिटिव है, रिश्ता जोड़ता है। सम्मान की उम्मीद सही है? जितना हम देते हैं, उतना लौटेगा। हमें अंदर की अच्छाई के लिए सम्मान मिलना चाहिए, बाहर की चीजों (जैसे पद, स्टाइल, पढ़ाई) के लिए नहीं। अगर मैं सब स्वीकार कर लूं (परिणाम चाहे जो भी हो), तो उम्मीद कर सकती हूं। उम्मीद रखो, लेकिन परिणाम जैसा है उसको मान लो।
इसके साथ आज एक कड़वी लेकिन बेहद जरूरी सच्चाई की बात करते हैं। इस नए साल में उठाकर फेंक दो उन पुराने रिश्तों को जो पिछले साल तुम्हारी आत्मा को चोट पहुंचाते रहे। जो तुम्हारी मुस्कान से जलते थे, जो तुम्हारी सच्चाई से असहज होते थे, और तुम्हारी शांति को देखकर बेचैन हो उठते थे।
श्री कृष्ण कहते हैं – जहां प्रेम नहीं, वहां बंधन नहीं। जहां सम्मान नहीं, वहां रिश्ता नहीं।
पुराने साल के बोझ को यहीं छोड़ दो। अब वो रिश्ते मत ढोओ जो तुम्हें छोटा बनाते थे, अपराधबोध दिलाते थे, और तुम्हारा आत्मसम्मान चुराते थे। टूटे हुए को थामे रखना मोह जैसा है – यह एक मीठा जहर है। इस नए साल में इस जहर से मुक्ति पाओ।
- खुद को बचाओ, अपना मन बचाओ, अपनी ऊर्जा बचाओ।
- उन लोगों से दूर हो जाओ जो तुम्हारी अच्छाई का फायदा उठाते थे।
- अकेलापन से डरो मत, क्योंकि अकेले रहकर तुम खुद से मिलोगे – और यही सबसे बड़ा उपहार है।
नया साल नई शुरुआत है। अब वो रिश्ते चुनो जो तुम्हें ऊंचा उठाएं, प्रेम दें, सम्मान दें। श्री कृष्ण कहते हैं – जो तुम्हें तुम्हारी असली प्रकृति से दूर ले जाए, उससे दूर रहो।
इस नए साल का संकल्प लो: अब हम वो नहीं सहेंगे जो हमें तोड़ता है। अब हम वो रिश्ता नहीं रखेंगे जो हमें छोटा करता है।
क्योंकि हम श्री कृष्ण के भक्त हैं – और कृष्ण के भक्त कभी छोटे नहीं होते!
नया साल 2026 आपको शांति, प्रेम, और श्री कृष्ण की असीम कृपा दे! राधे राधे 🌟🙏
