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Home Poetry “अपनी संस्कृति का ही पालन करो ना, मुझसे जरा भी मत डरो ना” – करोना

“अपनी संस्कृति का ही पालन करो ना, मुझसे जरा भी मत डरो ना” – करोना

राम युग में दूध मिला
और कृष्ण युग में घी
कोरोना युग में काढा मिले
डिस्टेंस बना कर पी

जब दुनिया लेके बैठी है
बड़े-बड़े परमाणु
पर ठोक गया सबको एक
छोटा सा विषाणु

कल रात सपने में
आया कोरोना
उसे देख जो मैं डरी 
और शुरू किया रोना
तो, मुस्कुरा  के
वह बोला

मुझसे मत डरो ना
कितनी अच्छी है वो
तुम्हारी संस्कृति

न चूमते, न गले लगाते
दोनों हाथ जोड़कर
तुम राम राम करते
वही करो ना
मुझसे मत डरो ना |

कहाँ से सीखा तुमने
रूम स्प्रे, बॉडी स्प्रे
पहले तो तुम धूप, दीप
कपूर, अगरबत्ती जलाते थे
तो वही करो ना
मुझसे बिल्कुल भी मत डरो ना

शुरू से तुम्हें
सिखाया गया
अच्छे से हाथ-पैर
धोकर घर में घुसो
मत भूलो
अपनी संस्कृति
वही करो ना
मुझसे बिल्कुल मत डरो ना

सादा भोजन
उच्च विचार
यही तो हैं
तेरे संस्कार

उन्हें छोड़
जंक फूड
फ़ास्ट फूड के
चक्कर में मत पड़ो ना
मुझसे बिल्कुल भी मत डरो ना

शुरू से ही
पशु-पक्षियों को
पाला-पोसा, प्यार दिया
रक्षण किया
तुम्हारी संस्कृति ने
तो अब उनका भक्षण मत करो ना
मुझसे ज़रा भी मत डरो ना

कल रात सपने में
आया कोरोना
बोला
अपनी संस्कृति का ही पालन करो ना
मुझसे जरा-सा भी मत डरो ना |

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