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Home Observation क्या हम दूसरों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हुए स्वयं को शक्तिशाली महसूस कर रहे हैं ?

क्या हम दूसरों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हुए स्वयं को शक्तिशाली महसूस कर रहे हैं ?

“आत्म नियंत्रण से शक्तिशाली महसूस किया जा सकता है न कि दूसरों को नियंत्रित करके “

लोगों को नियंत्रित करना :
हम हमेशा अपने परिवार, दोस्तों और सहयोगियों से प्यार करते है, लेकिन क्या वास्तव में हमेशा ऐसा होता है या केवल जब ही उन्हें पसंद करते हैं जब वे उस तरह से व्यवहार करते हैं, जैसा कि हम चाहते हैं???? क्या हम उन्हें कुछ सूक्ष्म तरीके से नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं ?? क्या यह हमारे लिए और हमारे रिश्ते के लिए अच्छा है? चलो आज हम देखते हैं दूसरों को कंट्रोल करना क्या होता है और अपनी दिनचर्या में कैसे हम दूसरों को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं…….

क्या हमें लोगों को नियंत्रित(controlling People) करना पसंद है या यूं कहें कि हम खुद ही नहीं जानते कि हम दूसरों को नियंत्रित या कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं? क्या हम अपने शुभचिंतकों या परिवार के सदस्यों को नियंत्रित करते हैं?

हाँ, हम उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि उनके लिए क्या ठीक है और क्या अच्छा है | हमें दूसरों को कंट्रोल करना अच्छा नहीं लगता | लेकिन हम सोचते हैं कि यदि वे हमारे अनुसार करेंगे तो उनके लिए अच्छा होगा | 

हम दूसरों को कंट्रोल या नियंत्रित क्यूँ करते हैं? दूसरों को कंट्रोल या नियंत्रित करने के पीछे हमारा क्या इरादा होता है ?


हम दूसरों को नियंत्रित करने की कोशिश इसलिए करते हैं क्योंकि हम अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों को अच्छा देखना चाहते हैं | अच्छा एक बहुत सापेक्ष शब्द है, लेकिन जो मेरे अनुसार अच्छा है, वह हमारे परिवार के लोगों के अनुसार, हमारे दोस्तों के अनुसार या किसी अन्य व्यक्ति के अनुसार जरूरी नहीं अच्छा हो | माता-पिता अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदार होते हैं। इसी प्रकार परिवार में हम अपने परिवार के सदस्यों की परवाह करते हैं। इसलिए हमें लगता है की उनकी भलाई के लिए उन्हें नियंत्रित करने की जरुरत है । 

जिस प्रकार एक प्रबंधक / सीईओ या किसी भी पद के रूप में हम अपनी टीम / कंपनी के लिए जिम्मेदार है । तब हमारा यह कर्तव्य होता है कि सभी काम सही ढंग से, सही समय पर और हर बार अच्छी गुणवत्ता के साथ हो । इसलिए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें दूसरों को नियंत्रित या कंट्रोल करने की जरुरत महसूस होती है । लेकिन कुछ लोग दूसरों पर कंट्रोल करने यानि दूसरों को अपने अनुसार सोचने और काम करने के लिए नियंत्रित करने पर अपने आपको शक्तिशाली महसूस करते हैं । वे लोग अपने आपको मजबूत और शक्तिशाली तब महसूस करते हैं जब बाकी लोग उनके ही अनुसार काम करते हैं जैसा वे चाहते हैं और उनके ही अनुसार सोचते हैं । कुछ लोग दूसरों को इसलिए कंट्रोल करते हैं क्योंकि उन्हें लगता हैं कि वे हमेशा सही होते हैं। इसी प्रकार कुछ लोग अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं और इसीलिए अपने आप को शक्तिशाली महसूस करवाने के लिए वे अपने आस-पास के लोगों को अपने अनुसार चलाने यानि कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं। 

नियंत्रण करना या कंट्रोल करना क्या है ?

जब लोग वो ही सुने और करें जो मैं चाहती हूँ और जब वो ऐसा करें तो उससे मुझे ख़ुशी मिले और जिससे मैं अपने आप को सहज महसूस करूँ। तो नियंत्रण का मतलब क्या हुआ – विशुद्ध रूप से स्वार्थी । 
आमतौर पर यह देखा जाता है कि 13-14 साल से कम उम्र के बच्चों को जैसा कहा जाए वे स्वीकार कर लेते हैं । तब हम यह कहते कि बच्चा हमारे कंट्रोल में है । लेकिन जब वे  बच्चे अपनी समझ के आधार पर अपने बड़े और छोटे  फैसले लेने लग जाते हैं और उनके द्वारा लिए गए फैसले यदि हमारी उम्मीदों से अलग हों या जो हमारे अनुसार सही न हो । तो हमें यह महसूस होता है कि बच्चे हमारे  कंट्रोल से बाहर हो गए हैं । बिल्कुल इसी तरह जब हमारे दोस्त, परिवार  सदस्य या हमारे आस पास के लोग भी इसी प्रकार व्यवहार करते  हैं यानि जैसा हम चाहते हैं उस तरह नहीं करते या समझते तो हमें लगता है वे गलत हैं । जबकि उनके अनुसार वे ठीक हो सकते हैं । 

नियंत्रण करना या कंट्रोल करना लोगों को शक्तिशाली बनाता है । क्या यह सच है ?

नहीं, नियंत्रण एक सबसे बड़ी कमजोरी है। यह उन लोगों पर निर्भर करता है, जो नियंत्रित हो रहे हैं । यदि वे नियंत्रित किया जाना पसंद नहीं करते हैं, तो नियंत्रक खुद ही क्रोध, हताशा, जलन और अन्य सभी नकारात्मक विचारों से घिर जाएगा । जब मैं लोगों को मेरी आज्ञा का पालन करने या बात मानने के लिए मजबूर करुँगी तो शायद वे डर / मजबूरी या कोई अन्य विकल्प न होने की वजह से मेरी बात मान सकते हैं । पर क्या यह सही है ? माना हम किसी भी प्रकार दूसरे पर दबाव देकर अपनी बात मनवा लें पर क्या सामने वाला मन और ख़ुशी से हमारे फैसले स्वीकार कर पायेगा ?

जैसे :-

एक पति अपनी पत्नी पर चिल्लाता है और कहता है कि उसकी सभी चीजें उसके अनुसार सही जगह पर रखी होनी चाहियें, पत्नी उनकी इस बात को कई कारणों से सुन सकती है :
-> घर पर शांति बनाए रखने के लिए । 
 -> केवल लोगों को दिखाने के लिए कि वह सही है (सामाजिक कारण) । 
-> केवल बच्चों के लिए – ताकि वे माता-पिता के झगड़े से परेशान नहीं हों । 

नियंत्रण एक ऐसी आदत है जिसने कई तलाकों को जन्म दिया है। लोग दूसरों को स्वीकार करने में असमर्थ हैं। लेकिन यदि हम दूसरों को जैसे भी वो हैं उसी प्रकार स्वीकार कर लें तो हम अपने आप को कमजोर और असुरक्षित महसूस नहीं करेंगे । 


दोस्तों ! हम खुद इस बात से अनजान होते हैं कि हम किसी को नियंत्रित या किसी को कंट्रोल कर रहे हैं । तो क्या आप जानना चाहते हैं कि कैसे आपको पता चलेगा कि आप दूसरों को नियंत्रित कर रहे हैं ? यदि आप के अंदर दूसरों को नियंत्रित करने या कंट्रोल करने की आदत है? क्या आप भी आपके अनुसार लोगों के विचारों के न मिलने से डिस्टर्ब हो जाते हैं? क्या आप अपने इन संस्कारों को बदलना चाहते हैं? तो अपने इन संस्कारों को  बदलने के लिए  अगला पोस्ट जरूर पढ़िए । 

तो दोस्तों ! अगली पोस्ट में मैं आपको दूसरों को नियंत्रित करने के संस्कार को किस प्रकार बदला जाये और इस संस्कार को बदलने के बाद हमारे रिश्तों में होने वाले अच्छे बदलाव के बारे में बताऊंगी । 

यदि यह ब्लॉग जानकारीपूर्ण(इंफॉर्मेटिव) हो तो साझा(शेयर) जरूर करें । 

धन्यवाद !

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