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प्रकृति के नियम

प्रकृति का पहला नियम

प्रकृति किसी से भेदभाव नहीं करती

मुझे हमेशा से ही ऐसा एहसास हुआ है कि कोई न कोई ऐसी सुप्रीम पॉवर है जो हमें उसके होने का एहसास दिलाती रहती है | फिर वह हम पर है कि हम प्रकृति द्वारा दिए गए अवसरों को किस प्रकार अपने जीवन में प्रयोग करते हैं |

प्रकृति का पहला नियम है कि इस ब्रह्माण्ड में चाहे वो धरती है, कोई इंसान है, या कोई अन्य जीव है, प्रकृति बिना किसी भेदभाव के हमेशा सबके साथ अपना ताल मेल बनाये रखती है | फिर चाहे हम उसके इस तालमेल को समझ कर अपने जीवन में कुछ अच्छा करने के लिए इस्तेमाल करें या न करें | प्रकृति निरंतर अपना काम करती रहती है |

प्रकृति इस ब्रह्माण्ड में मौजूद हर एक जीव को बेहतर ढंग से जीवन जीने के समय समय पर अनेकों अवसर देती है | लेकिन यदि कोई प्रकृति के नियमों के अनुसार नहीं चलता तो वह उसे कभी नहीं बख्शती | यदि प्रकृति के खिलाफ या उसके नियमों अनुसार कभी कुछ नहीं होता तब यहां दुसरे चांस की कोई संभावना नहीं होती | यहां किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता, यदि आपसे गलती हुई है तो यहां आपको अपनी गलती सुधारने का दूसरा मौका बिल्कुल नहीं दिया जायेगा फिर चाहे आप बहुत अमीर हो, बहुत सुंदर हो, आप किसी बड़े औदे पर ही क्यों न हो और या फिर चाहे आप ये समझते हों कि आप भगवान के बहुत प्रिय भगत हैं |

चलो प्रकृति के एक साधारण से उदहारण से समझते हैं की ऐसा कैसे होता है, जैसे यदि आप 3 मंजिला छत से ज़मीन पर कूदते हैं तो ऐसा बिलकुल नहीं हो सकता कि आपको कोई चोट न लगे | प्रकृति के नियमों के अनुसार यदि कोई ऐसा करता है तो उसको चोट लगना लाज़मी है | 

इसी प्रकार यदि हम ज़हर पी रहे हैं और किसी औऱ के मरने की उम्मीद कर रहे हैं तो ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला | अब आप बोलोगे कि यह सबको ही पता है कि जो ज़हर लेगा वो ही मरेगा | लेकिन अनजाने में हम सारा दिन ऐसा करते है | आइये समझते हैं कैसे :

यदि हमें किसी की कोई बात, काम या व्यवहार अच्छा नहीं लगता तो हम मन ही मन, या सीधा उस व्यक्ति को ही या कई बार तो दूसरों के आगे भी उस इंसान को बहुत बुरा-भला कहते हैं, गालियां देते हैं और कहते हैं कि वो सुधर क्यों नहीं जाते, वो ऐसा क्यों करते हैं |

लेकिन क्या ऐसा करने से कुछ होगा | बिल्कुल नहीं | तो यह सोचिये कि आप खुद इतना बुरा-भला बोल रहे हो और सामने वाले के सुधरने की उम्मीद लगा रहे हो | यह बिल्कुल काम नहीं करेगा |  यदि आप किसी को बदलना चाहते हो तो उसके लिए आपको खुद पर काम करना होगा न कि सामने वाले पर | आप अपने व्यवहार में बदलाव लाइए अगर सामने वाले को बदलना होगा तो वह अपने आप बदल जाएगा |

यदि खेत में बीज न डाले जाएँ तो कुदरत (Nature) उसे घास-फूस से भर देती है । उसी तरह से यदि दिमाग में सकारात्मक-विचार न भरें जाएँ तो नकारात्मक-विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं । आज के समय में अपने को pseudo-‍ˈसूडो’ rationalist कहने वाले व्यक्ति नकारात्मक विचारों से प्रभावित होकर विनय से परे हो जाते है। वे न किसी सम्माननीय व्यक्ति के सामने हाथ जोड़ते हैं या नतमस्तक होते है। सम्मान देने के समय उनके मन में नकारात्मक ऊर्जा उभरती है। शीलवान धम्म को धारण करता है और दुशील दुर्भावना से ग्रस्त होता है।

प्रकृति का दूसरा नियम

जिसके पास जो होता है वह वही बाँटता है

  • मित्र- मैत्री बाँटता है।
  • द्वेषी- द्वेष बाँटता है।
  • सुखी – सुख बाँटता है ।
  • दु:खी – दुःख बाँटता है ।
  • ज्ञानी – ज्ञान बाँटता है ।
  • मुर्ख- मुर्खता बाँटता है।
  • भ्रमित – भ्रम बाँटता है।
  • जो खुद डरा हुआ हो-वही औरों को डराता है।
  • जो खुद दबा हुआ हो-वही औरों को दबाता है ।
  • जो खुद चमका हुआ हो-वही औरों को भी चमका सकता है ।
  • बस ठीक उसी तरह जो इंसान खुद सफल (Successful) हो-वही औरों को भी सफलता (Success) दिला सकता है।

जिसके पास जो है वह वही चीज बाँटता है।

नमो बुद्धाय !

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