Skip to content
Home Poetry ये ग़म क्या दिल की आदत है? नहीं तो

ये ग़म क्या दिल की आदत है? नहीं तो

Table of Contents

एक पुरानी कविता को कुछ अलग शब्दों में दर्शाने की छोटी सी एक कोशिश :-

ये ग़म क्या दिल की आदत है? नहीं तो
किसी से कुछ शिकायत है? नहीं तो

है वो इक ख़्वाब-ए-बे ताबीर तो इसको
भुला देने की नीयत है? नहीं तो

किसी के बिन, किसी की याद के बिन
जीने की हिम्मत है? नहीं तो

किसी सूरत पर अब दिल नहीं लगता? हां
तो कुछ दिनों से ये हालत है? नहीं तो

तेरे इस हाल पर सब को हैरत है
तुझे भी इस पे हैरत है? नहीं तो

उनकी बहुत उम्मीदों से तुझको
अमन पाने की हसरत है? नहीं तो

तू रहता है ख्याल-ए-ख्वाब में गम
तो इस वजह से ये फुरसत है? नहीं तो

वहां वालों से है इतनी मोहब्बत
तो यहां वालों से नफरत है? नहीं तो

सबब जो इस जुदाई का बना है
क्या वो मुझसे भी खुबसूरत है? नहीं तो

शुक्रिया !!!

Share Post:

Latest Posts

Categories

Related Posts

कड़वी लेकिन जरूरी सच्चाई: उन रिश्तों से मुक्ति पाओ जो तुम्हारी आत्मा को खाली कर देते हैं

आज एक कड़वी लेकिन बेहद जरूरी सच्चाई की बात करते हैं। उठाकर फेंक दो उन रिश्तों को जो रोज तुम्हारी आत्मा को चोट पहुंचाते हैं। जो तुम्हारी मुस्कान देखकर अंदर से जलते हैं। जो तुम्हारी सच्चाई से असहज हो जाते हैं। जो तुम्हारी शांति को देखकर बेचैन हो उठते हैं।

Read More »
New Year 2026 Kanha

2026 नया साल, नए सपने, नई उम्मीदें! 💫

New Year 2026: नई शुरुआत में चलिए एक गहरा और खूबसूरत संकल्प लें — सच्चे सम्मान का संकल्प। सम्मान क्या है? सम्मान यानी लोगों को बिना कुछ कहे पूरी तरह मान लेना। हमें लगे कि ये गलत है, फिर भी उन्हें जैसा है वैसा ही स्वीकार कर लें। किसी पर

Read More »