आदत से मुक्ति
कभी कभी हम बहुत खुश हो जाते हैं और कभी कभी बहुत निराश हो जाते हैं , ऐसा होना स्वाभाविक है | किसी के जरा सा उकसा देने पर ही हम गुस्से से भर जाते…
कभी कभी हम बहुत खुश हो जाते हैं और कभी कभी बहुत निराश हो जाते हैं , ऐसा होना स्वाभाविक है | किसी के जरा सा उकसा देने पर ही हम गुस्से से भर जाते…
तो क्या हुआ !एक बार फिर से… दिल ही तो “दुखा” है | तो क्या हुआचाहे अब कोई अपना ही रूठा है | तो क्या हुआरती भर हैं खुशियाँ और पहाड़ जैसे हैं ग़म |…
Self-care is more than just reading a book or drawing a relaxing bath every now and then. Read on to understand the three pillars of self-care and how to properly embrace them. Amidst unsettling times…
प्रकृति का पहला नियम प्रकृति किसी से भेदभाव नहीं करती मुझे हमेशा से ही ऐसा एहसास हुआ है कि कोई न कोई ऐसी सुप्रीम पॉवर है जो हमें उसके होने का एहसास दिलाती रहती है…
We all have heard of the word “tolerance”. We also use it many times with people like “I am just tolerating my boss”, “I can tolerate his laziness only for sometime”, “I am just tolerating…
Thank You, Thank You So much To came into my Life… You came and You did well… I needed you… You have made me happy… Extremely happy…Thank You… Thank you for being my best friend……
जो लोग यह समझ नहीं पाते कि…. “औरत” क्या चीज़ है ??? वो पहले ये समझ लें कि… “औरत” कोई चीज़ नहीं है |
मुच्छड़ के नाम से मशहूर पानवाला जिनका असली नाम जयशंकर तिवारी है। वह मूल रूप से इलाहाबाद के हांडिया जिले के तिवारीपुर नामक गांव के रहने वाले हैं। वह 1977 में मुंबई आए और तब…
मेरे मन में हमेशा कोई न कोई सवाल उठता रहता है जिनमें से कुछ सवालों के जवाब कभी प्रत्यक्ष रूप से (Directly) और कभी अप्रत्यक्ष रूप से (Indirectly) मुझे मेरे आस पास मौजूद मेरे अपनों…
जिंदगी यदि किसी मोड़ पर आ कर उलझ-पुलझ होकर जलेबी सी बनने लगे तो उसे चाशनी में डबो कर मज़े लेने की योजना पर अमल शुरू कर देना चाहिए | जीवन की इस भागदौड़ में…
10 ways to develop a Strong belief System Always respond positively, whether the circumstances are according to you or not. Do not end the day with a negative statement because your subconscious mind responds to…
यहाँ हकीकत का तेज़ मांझा है तो…. ख्वाहिशों की उड़ान भरने वाली पतंग भी | डोर जैसी है ये ज़िन्दगी… तो खींचा-तानी तो चलती रहेगी | ज़िन्दगी की कलम पर नहीं है अब ऐतबार मुझे…